Page 4 - चौठचन्द्र पूजा
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॥   ि� ती य  अ � या य  ॥

                                                    पूजा प��त



                                                       �व�ध एवं समय









                                े
                                                                                                    �
                                                                                                 �
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                                                                                       े
                                                                                       ू
                                                        े
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                                                                        ू
                                                                     ै
                                                                                    े
                                                                                े
                                                                                                     े
             यह चौठच�� पजा �वशष कर स�या (शाम) म करन का �ावधान ह। पजन करन वाल पर �दन �त म रहग। �क�त          ु
                                                        े
             आव�यकता अनसार ज�रत हो तो फलाहार कर सकत ह।
                                                          �
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                      �
             �ती शाम म �नान करन क प�ात नतन व�� या धला �आ व�� धारण करग, तदन�तर श� आसन पर प��म �दशा क�
                                े
                                                                         �
                                                                                    ु
             ओर मख करक बठ जायग। अन�तर श� जल म गगाजल �मला दग। तदन�तर अ�रपन क अनसार पजन साम�ी को
                                                     �
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                                               ँ
             सजाकर यथा�थान (फल का डाली तथा छाछ� (दही)) को रखग।
                                                                       �
                                                                                                      ँ
                                                                                              े
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                                                                              े
             उसक बाद कलश का अ�रपन जो होगा उस पर दीपय�त कलश को रखग। उसक बाद दा�हन हाथ क म�य अगली म           �
                                                                                                       ु
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                                                                                       े
             कश �न�म�त प�व�ी धारण करग, तथा दा�हन हाथ म तकशा (कश) तथा जल को लकर अपन शर�र को �स�त करन स       े
                                      े
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             पूव� इस म� को पढ़ग, अन�तर शर�र को �स�त करग।
                     ं
                                                       े
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                                            ं
                 नमो अप�व�ः प�व�ो वा सवा�व�था गतोऽ�प वा ।
                 यः �रत् पु�डर�का� स बा�ा�य�तरः शु�चः ।।
                                  ं
                      े
                 नमो पु�डर�का�ः पुनातु ।।
                                                               ू
                                                  ❖ �ी चौठच�� पजा · 3 ❖
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